राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में बढ़ता नामांकन प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को दे रहे नया आयाम

प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तायुक्त बनाने के लिए शिक्षा विभाग कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। आज प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर गौर करें तो बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, मूलभूत सुविधाओं और आलिशान विद्यालय भवन ना सिर्फ निजी विद्यालयों को टक्कर दे रहे हैं बल्कि हर किसी का ध्यान भी अपनी ओर खींच रहे हैं। यही कारण है कि पहले के मुकाबले सरकारी विद्यालयों के नामांकन में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी हुई है।

कोरोनाकाल की विषम परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान के सरकारी विद्यालयों ने नई मिसाल कायम की है। विगत दो वर्षों में प्रदेश के विद्यार्थियों व विभाग के सामने कोरोना महामारी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई तो वहीं शिक्षा विभाग ने अपने डिजिटल नवाचारों से इस चुनौती को अवसर के रूप में बदलने का उम्दा काम किया। जिसकी वाहवाही भी देशभर में खूब हुई।

सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ोतरी के पिछे छोटे-मोटे उद्योग- धंधों का बंद होना, निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी, आर्थिक संकट, गुणवत्ता युक्त शिक्षा में सुधार जैसे कई कारण शामिल हैं जिनकी वजह से अभिभावकों का रूझान इन विद्यालयों की तरफ हुआ है वहीं राजस्थान में मिल रही मुफ्त अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा भी इसका प्रमुख कारण है। यही वजह है कि प्रदेश के सरकारी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों ने चाहे उच्च वर्ग हो या निम्न वर्ग हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

करीब दो साल पहले जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर 205 महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोले गये जिनका आकंड़ा वर्तमान में 348 हो गया है वहीं इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 1 लाख के पार पहुंच गई है। इन विद्यालयों में प्रवेश की होड़ इस कदर है कि एक एक सीट पर हजारों बच्चों के आवेदन प्राप्त होते हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम देने के लिए महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल मील का पत्थर साबित हुए हैं।

इन विद्यालयों की बढ़ती लोकप्रियता को मद्देनजर रखते हुए मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी ने बजट घोषणा में 5000 से अधिक आबादी वाले गांव, कस्बों में 1200 और अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलने का फैसला किया। तो वहीं इन विद्यालयों में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं का संचालन करने वाला राजस्थान संपूर्ण उत्तर भारत में पहला राज्य बन गया है। सत्र 2021-22 में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया है।  

महज दो साल में सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल का बढ़ता दायरा इस ओर इशारा कर रहा है कि सरकार प्रदेश के शिक्षा व्यवस्था को उच्च कोटि का बनाये रखने की पूर-जोर कोशिश कर रही है तो वहीं शिक्षा विभाग अपने नवाचारों से इसे साकार करने में लगा है।   

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